Aaya kalame haq mai rafana Lyrics in Urdu
آیا کلامِ حق میں رَفَعْنَا رفعت ہی کچھ ایسی ہے
جس نے مٹانا چاہا مٹا خود عظمت ہی کچھ ایسی ہے
جھومیں نہ جھومیں آپ کی مرضی نعتِ رسالت کو سن کر
کہ جھوم رہے ہیں سارے ملائک کہ مدحت ہی کچھ ایسی ہے
نعتِ نبی مستی میں پڑھوں گا پیشِ نکیر و منکر میں
پوچھنے پہ کہہ دوں گا کروں کیا عادت ہی کچھ ایسی ہے
میں نے یہ پوچھا چاند سے بولو کیسے ہوئے تم دو ٹکڑے
تو بولا قمر انگشتِ نبی کی قدرت ہی کچھ ایسی ہے
بولے عمر میں قتلِ نبی کے واسطے نکلا تھا لیکن
دیکھتے ہی خود قتل ہوا میں کہ صورت ہی کچھ ایسی ہے
نعتِ نبی کے شُغْلْ نے فیضی کو اتنا انمول کیا
ارے کوئی نہیں جو اس کو خریدے کہ قیمت ہی کچھ ایسی ہے
جس نے مٹانا چاہا مٹا خود عظمت ہی کچھ ایسی ہے
جھومیں نہ جھومیں آپ کی مرضی نعتِ رسالت کو سن کر
کہ جھوم رہے ہیں سارے ملائک کہ مدحت ہی کچھ ایسی ہے
نعتِ نبی مستی میں پڑھوں گا پیشِ نکیر و منکر میں
پوچھنے پہ کہہ دوں گا کروں کیا عادت ہی کچھ ایسی ہے
میں نے یہ پوچھا چاند سے بولو کیسے ہوئے تم دو ٹکڑے
تو بولا قمر انگشتِ نبی کی قدرت ہی کچھ ایسی ہے
بولے عمر میں قتلِ نبی کے واسطے نکلا تھا لیکن
دیکھتے ہی خود قتل ہوا میں کہ صورت ہی کچھ ایسی ہے
نعتِ نبی کے شُغْلْ نے فیضی کو اتنا انمول کیا
ارے کوئی نہیں جو اس کو خریدے کہ قیمت ہی کچھ ایسی ہے
جناب حبیب اللہ فیؔضی صاحب
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Aaya kalame haq mai rafana Lyrics in Hindi
आया कलामे हक़ में रफ़ाना रिफअत ही कुछ ऐसी है
जिसने मिटाना चाहा मिटा ख़ुद अज़मत ही कुछ ऐसी है
झूमें न झूमें आपकी मर्ज़ी नाते रिसालत को सुनकर
कि झूम रहे हैं सारे मलाइक मिदहत ही कुछ ऐसी है
नाते नबी मस्ती में पढ़ूंगा पेशे नाकीरो मुनकर में
पूछने पे कह दूंगा करूं क्या आदत ही कुछ ऐसी है
मैंने ये पूछा चांद से बोलो कैसे हुए तुम दो टुकड़े
तो बोला क़मर अंगुश्ते नबी की क़ुदरत ही कुछ ऐसी है
बोले उमर में क़त्ले नबी के वास्ते निकला था लेकिन
देखते ही ख़ुद क़त्ल हुआ में कि सूरत ही कुछ ऐसी है
नाते नबी के शुग़्ल ने फ़ैज़ी को इतना अनमोल किया
अरे कोई नहीं जो इसकी ख़रीदे कि क़ीमत ही कुछ ऐसी है
जिसने मिटाना चाहा मिटा ख़ुद अज़मत ही कुछ ऐसी है
झूमें न झूमें आपकी मर्ज़ी नाते रिसालत को सुनकर
कि झूम रहे हैं सारे मलाइक मिदहत ही कुछ ऐसी है
नाते नबी मस्ती में पढ़ूंगा पेशे नाकीरो मुनकर में
पूछने पे कह दूंगा करूं क्या आदत ही कुछ ऐसी है
मैंने ये पूछा चांद से बोलो कैसे हुए तुम दो टुकड़े
तो बोला क़मर अंगुश्ते नबी की क़ुदरत ही कुछ ऐसी है
बोले उमर में क़त्ले नबी के वास्ते निकला था लेकिन
देखते ही ख़ुद क़त्ल हुआ में कि सूरत ही कुछ ऐसी है
नाते नबी के शुग़्ल ने फ़ैज़ी को इतना अनमोल किया
अरे कोई नहीं जो इसकी ख़रीदे कि क़ीमत ही कुछ ऐसी है
जनाब हबीबुल्लाह फैजी साहब
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Aaya kalame haq mai rafana Lyrics in English
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